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कश्मीर के हस्तशिल्प कारोबार को मिलेगी नई दिशा, कारीगरों के बच्चों को एमबीए कराने की पहल

Kavita2
21 Aug 2026 4:45 PM IST
कश्मीर के हस्तशिल्प कारोबार को मिलेगी नई दिशा, कारीगरों के बच्चों को एमबीए कराने की पहल
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श्रीनगर। कश्मीर के सदियों पुराने हस्तशिल्प और हथकरघा कारोबार को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढालने की दिशा में हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है। विभाग अब कारीगरों और बुनकरों के बच्चों तथा उनके आश्रितों को क्राफ्ट मैनेजमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप में एमबीए कराने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इसका उद्देश्य पारंपरिक हुनर को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ उसे आधुनिक प्रबंधन, डिजाइन, तकनीक और उद्यमिता से जोड़ना है।

दो वर्षीय यह स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम श्रीनगर स्थित क्राफ्ट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (CDI) में संचालित किया जा रहा है और कश्मीर विश्वविद्यालय से संबद्ध है। इस पहल की सबसे खास बात यह है कि निर्धारित पात्रता मानदंड पूरा करने वाले विद्यार्थियों की पूरी ट्यूशन फीस सरकार की ओर से प्रतिपूर्ति की जाएगी। इससे उन परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा का अवसर मिलने की उम्मीद है, जो पीढ़ियों से हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।

परंपरा के साथ आधुनिक शिक्षा का मेल

कश्मीर का हस्तशिल्प क्षेत्र अपनी विशिष्ट कला और पारंपरिक तकनीकों के लिए देश-दुनिया में पहचान रखता है। कालीन, पश्मीना, पेपर माशे, लकड़ी की नक्काशी, कानी बुनाई और अन्य पारंपरिक उत्पाद कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। बड़ी संख्या में परिवार इन कामों पर निर्भर हैं और कई शिल्प पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ते आए हैं।

हालांकि बदलते बाजार, नई तकनीक और उपभोक्ताओं की बदलती पसंद के कारण पारंपरिक कारोबार के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी हुई हैं। ऐसे में विभाग का मानना है कि केवल पारंपरिक कौशल को संरक्षित करना पर्याप्त नहीं होगा। इसे आधुनिक कारोबारी समझ के साथ जोड़ना भी जरूरी है।

इसी सोच के तहत कारीगरों और बुनकरों की नई पीढ़ी को प्रबंधन एवं उद्यमिता की शिक्षा देने पर जोर दिया जा रहा है। इससे युवा अपने पारिवारिक हुनर को केवल रोजगार तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यवस्थित व्यवसाय और ब्रांड के रूप में विकसित कर सकेंगे।

डिजाइन और ब्रांडिंग पर भी जोर

क्राफ्ट मैनेजमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप में एमबीए का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक शिल्प की समझ के साथ आधुनिक कारोबारी कौशल उपलब्ध कराना है। आधुनिक डिजाइन, मार्केटिंग, ब्रांडिंग, कारोबार प्रबंधन और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों की जानकारी युवाओं को अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।

विभाग का मानना है कि यदि कारीगर परिवारों की नई पीढ़ी को बाजार की मांग, उपभोक्ता व्यवहार और आधुनिक कारोबार की रणनीतियों की जानकारी मिले, तो स्थानीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

इसके अलावा डिजिटल माध्यमों और आधुनिक मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भी इस तरह की शिक्षा उपयोगी साबित हो सकती है। युवा पारंपरिक उत्पादों को नए डिजाइन और प्रस्तुति के साथ बाजार में उतारने के साथ उनकी बिक्री के लिए आधुनिक माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

नई पीढ़ी को कारोबार संभालने का अवसर

कश्मीर में कई हस्तशिल्प और हथकरघा कारोबार पारिवारिक स्तर पर संचालित होते हैं। इनमें कारीगर अपने कौशल के आधार पर उत्पादन करते हैं, जबकि कारोबार के प्रबंधन, बिक्री और बाजार विस्तार की जिम्मेदारी अलग तरह के विशेषज्ञों पर निर्भर हो सकती है।

ऐसे में कारीगर परिवारों के बच्चों को प्रबंधन की शिक्षा मिलने से उन्हें अपने पारिवारिक व्यवसाय को बेहतर तरीके से संभालने का अवसर मिल सकता है। वे उत्पादन के साथ-साथ लागत, बाजार, ब्रांड और ग्राहक की जरूरतों पर भी ध्यान दे सकेंगे।

यह पहल उन युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है जो पारंपरिक पारिवारिक व्यवसाय से जुड़े रहना चाहते हैं, लेकिन उसे आधुनिक तरीके से आगे बढ़ाना चाहते हैं।

सरकार उठाएगी ट्यूशन फीस का भार

इस योजना का सबसे आकर्षक पहलू पात्र विद्यार्थियों की पूरी ट्यूशन फीस की सरकारी प्रतिपूर्ति है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर कारीगर और बुनकर परिवारों के बच्चों के लिए पाठ्यक्रम में प्रवेश लेना आसान हो सकता है।

उच्च शिक्षा की फीस कई परिवारों के लिए बड़ी बाधा बन सकती है। ऐसे में सरकार की ओर से ट्यूशन फीस की प्रतिपूर्ति युवाओं को इस पाठ्यक्रम की ओर आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

हालांकि, फीस प्रतिपूर्ति का लाभ निर्धारित पात्रता मानदंड पूरा करने वाले विद्यार्थियों को ही मिलेगा। इसलिए इच्छुक विद्यार्थियों को प्रवेश और पात्रता से संबंधित शर्तों को ध्यान से पूरा करना होगा।

कश्मीर की विरासत को वैश्विक बाजार से जोड़ने की कोशिश

हस्तशिल्प क्षेत्र में वैश्विक बाजार की संभावनाएं लगातार बनी हुई हैं। कश्मीर के पारंपरिक उत्पादों की विशिष्टता उन्हें अलग पहचान देती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में सफल होने के लिए गुणवत्ता के साथ डिजाइन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और कारोबारी रणनीति की भी आवश्यकता होती है।

ऐसे में कारीगर परिवारों के शिक्षित युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। वे परंपरागत तकनीकों को बनाए रखते हुए उत्पादों में आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बदलाव ला सकते हैं।

रोजगार और उद्यमिता को भी मिलेगा बढ़ावा

इस पहल का एक उद्देश्य युवाओं को नौकरी तलाशने वालों के बजाय उद्यमी बनने के लिए तैयार करना भी है। एमबीए की शिक्षा प्राप्त करने के बाद विद्यार्थी अपने परिवार के मौजूदा कारोबार का विस्तार कर सकते हैं या नए उद्यम शुरू कर सकते हैं।

इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। साथ ही उत्पादन, डिजाइन, पैकेजिंग, मार्केटिंग और बिक्री से जुड़े अन्य लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है।

कश्मीर के हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र को आधुनिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की यह पहल परंपरा और तकनीक के बीच सेतु बनाने की कोशिश है। यदि कारीगर परिवारों की नई पीढ़ी अपने पारंपरिक हुनर को प्रबंधन और उद्यमिता की शिक्षा के साथ जोड़ती है, तो कश्मीर के हस्तशिल्प कारोबार को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नई पहचान मिल सकती है।

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